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08 April, 2012

गारी-गुप्ता हो रहा, जाल जगत पर आज -

गारी गुप्ता कर रहा, जाल जगत पर आज ।
मूल विषय खोवे सकल, गिरे गजल पर गाज ।

गिरे गजल पर गाज, वंदना के स्वर रूठे ।
कौन यहाँ महफूज, मिटे सब दुष्ट अनूठे ।

भौतिकता धन धान्य, जला सकती चिंगारी ।
मन जीवन सम्मान, जलाती कटुता गारी ।।

बोदा लड़का था बड़ा, पर छुटका विद्वान ।
मार-पीट घूमे-फिरे, सारा घर उकतान ।
सारा घर उकतान, करूँ नित मार कुटाई । 
छुटका बसा विदेश, पूर कर बड़ी पढ़ाई ।
रविकर बूढ़ी देह, सेवता घर-भर बड़का ।
दूँ उसको आशीष, होय इक बोदा लड़का ।।
 
 

1 comment:

  1. सच्ची बात कही थी मैंने.......!
    ...आगे भी कहता रहूँगा !

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