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18 July, 2012

बची नारिया किन्तु, उसे चाक़ू से गोदा-रविकर

करे सुरक्षित नारि दो, लुटा जाय जो जान ।
ऐ करीम टाटानगर, झारखण्ड की शान ।

झारखण्ड की शान, पीटते नारी गुंडे ।
कर करीम प्रतिरोध, हटाता वह मुस्टंडे ।

बची नारिया किन्तु,  उसे चाक़ू से गोदा ।
होता आज शहीद, उजड़ अब गया घरौंदा ।।


8 comments:

  1. Replies
    1. इस कुर्बानी को याद करने या श्रद्धांजलि देने के लिए
      किसी नारीवादी ने कोई पोस्ट नहीं लगाईं, कोई रचना नहीं नजर आई ||

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  2. सुन्दर प्रस्तुति .बधाई .
    मार्मिक .

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  3. गया घरौंदा उजड़,बचाई इज्ज़त उसने
    बांधे बिना कलाई राखी पहनी जिसने!

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  4. हम इस शहीद को करते हैं नमन
    मां बहनों को बचाने किया अपना हवन ।

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  5. बहुत दुखद है यह सब...

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