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27 July, 2012

घर से निकाला आज बेटे ने मुझे, पा एक बेटी रास्ते पर आ गया -

मिल गई मुस्कान मरियल मोड़ पर ।
छोड़ कर हैवान कोई था गया -

तन-बदन में हो रही थी सुरसुरी-
कैसे कलेजा काट कर फेंका गया ।

जिस श्वान ने कुत्ते भगाए थे घिनौने  -
आवारगी से जाति की शरमा गया । 

भ्रूणहत्या का पुराना दोष मुझपर -
दुष्कर्म का कटु स्वाद पूरा पा गया ।

घर से निकाला आज बेटे ने मुझे-
पा एक बेटी रास्ते पर आ गया ।।
रविकर का प्रवास:शनिवार- IIIT, Allahabad
रविवार : लखनऊ 
सोमवार : इलाहाबाद 
मंगलवार- धनबाद वापस

9 comments:

  1. रविकर जी, ना चाहते हुए भी आपको 'दिकशूल' रचना सुना रहा हूँ...


    "दिक् शूल"

    सोम-शनि है प्राची प्रतिकूल

    दिवस रवि का उसके अनुकूल.

    प्रतीची में मंगल-बुध जाव

    शुक्र-रवि में होवें दिकशूल.



    उदीची में बुध-मंगल भार

    शुक्र शुभ होता शुभ गुरुवार.

    अवाची को जाना शनि-सोम

    गुरु को चलना शकुन-विलोम.


    ______________

    उदीची - उत्तर दिशा

    अवाची - दक्षिण दिशा

    प्राची - पूर्व दिशा

    प्रतीची - पश्चिम दिशा



    मैं इस कविता को देना नहीं चाहता था.... क्योंकि अब मैं इस विचारधारा से बिलकुल सहमत नहीं हूँ कि 'दिकशूल' जैसा कुछ होता है.... ये कोरा अंधविश्वास है... जब ये रचना बनायी थी. तब मैं दिकशूल से बहुत प्रभावित रहता था.

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    1. जी
      पिताजी बोला करते थे-
      सोम शनिश्चर पूरब न चालु मंगल बुध उतर दिश कालू |
      रवि- शुक्र जो पश्चिम जावे, हानि होय कुछ लाभ न पावे-

      फिर यह भी बताते थे की अपने जन्मस्थान के लिए यह मानी नहीं है-
      वैसे अपने एक मित्र की मदद करने जा रहा हूँ-
      उनकी बेटी का एड्मिसन हुआ है वहां |
      आभार |||
      दोनों बेटियां और उनकी माँ लखनऊ में है-

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  2. beti ke paida hone par ghar me matam chhata,
    par beta kya laya jeevan me bap samjh n pata.
    beti jaye dooje ghar jab bap ke aansoo niklen,
    beta karta kam hai aise ghar se bap hi nikle.

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  3. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  4. रवि जी,आपके ब्लॉग पर देरी से आने के लिए पहले तो क्षमा चाहता हूँ. कुछ ऐसी व्यस्तताएं रहीं के मुझे ब्लॉग जगत से दूर रहना पड़ा...अब इस हर्जाने की भरपाई आपकी सभी पुरानी रचनाएँ पढ़ कर करूँगा....कमेन्ट भले सब पर न कर पाऊं लेकिन पढूंगा जरूर

    आपकी रचना बहुत प्रभावशाली है. बधाई

    नीरज

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  5. आपके दोहे बहुत अर्थपूर्ण होते हैं. शुभकामनाएँ.

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  6. These lines inspire truely.. thanks for writing such lines..

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  7. बहुत सराहनीय प्रस्तुति.
    बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में.


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