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17 August, 2012

व्यंग-चिकोटी काट, पुरुष जुल्मी शर्मिन्दे

बैठ गए चौपाल में, हुई बतकही तेज ।
बारी बारी सिलसिला, रखिये सिला सहेज ।।
समय : 9 साल पहले का दृश्य -

नाजायज नाजायज नाजायज । 
ये पञ्च यह पंचायत नाजायज है ।
मुनिया बहू रोमन में लिखी इबारत पढ़ गईं ।
इस नासमझी पर भी बटुक बिहारी की पंचायत के सभी सदस्यों ने शान्ति नहीं भंग होने दी । यहाँ तक कि आज के काले कृष्ण सिन्धी भी खामोश ही रहे और बड़ी शालीनता से नारी सशक्तिकरण  का नारा बुलंद होते देखते रहे । युवा तुर्क नवाज कुछ जवाब देने के लिए उठे ही थे कि बिहारी बाबू ने उनका कुरता खींचकर बैठा लिया और फुसफुसाए-बहुरानी को हिंदी नहीं आती-देखते नहीं चेहरा भावना  शून्य और  सपाट है -मत तूल  दो  मामले को, और नल वाला बिल पास करवाओ ।नवाज मियां बैठ गए । चौपाल पर कार-बार बराबर चलता रहा । 

अब यही काले कृष्ण विगत दो चुनावों से दो नावों पर वेटिंग-इन पञ्च प्रधान हैं और मुनिया अम्मा हो चुकी हैं । 
पंचायत की सारी बागडोर, क्या कुत्ते और क्या सिंह, सबका पट्टा भी उन्ही के हाथ मे है । जबसे काले कृष्ण के तीन सदस्य नोट-काण्ड में धराये हैं और जब से झारखण्ड में निर्दलीय कोड़ा की सरकार की धार देखें हैं -अगला पञ्च छोटी पार्टी का होगा, यही रट लगाये हैं । कल तो हद हो गई ।
कहना चाह रहे थे कि  पिछली पंचायत नाजायज है, कह गए इस पंचायत को । भड़क गई अम्मा । शब्द का अर्थ अब तक रट चुकी थी-दिग्गी गुरु रोज हिंदी सिखा ही रहे थे -सो सीख चुकी है - हिंदी,  मुनिया अम्मा । कल ही तो दीक्षांत हुआ है इनका । माफ़ी मंगवाकर ही दम लिया बुढऊ से । 
जय हो -
अब चौपाल पर रविकर कविराज की एक कुंडली -

सिन्धी-शिंदे खा रहे,  निज गृह नित फटकार |
नारी शक्तिकरण में, बिला-वजह की रार |

बिला-वजह की रार, नहीं नाजायज सत्ता |
 बने असम में फिल्म, चले दिल्ली-कलकत्ता |


व्यंग-चिकोटी काट, पुरुष जुल्मी शर्मिन्दे ||
जया सोनिया शक्ल, कंपाती सिन्धी-शिंदे |

6 comments:

  1. मान गए कविराज जबरदस्त ..

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  2. New thought.

    4 बेटों की मौत,अंतिम इच्छा के लिए पिता ने श्मशान में काटा केक…!
    http://pyarimaan.blogspot.com/2012/08/blog-post_18.html

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  3. पुरुष जुल्मी, शर्मिन्दे ही तो नही होते ।

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  4. कमाल की कुण्डली! वाह !

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