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27 November, 2012

रविकर का आशीष, बेटियाँ बढ़ें हमारी

उत्कृष्ट एग्रीगेटर हमारी वाणी पर इस  ब्लॉग  विशेष का प्रकाशन नहीं हो पा रहा है- असुविधा के लिए खेद प्रकट करता हूँ -रविकर

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 सात्विक-जिद से आसमाँ, झुक जाते भगवान् ।
पीर पराई बाँट के, धन्य होय इंसान ।
धन्य होय इंसान, मिलें दुर्गम पथ अक्सर ।
 हों पूरे अरमान, कोशिशें कर ले बेहतर ।
बाँट एक मुस्कान, मिले तब शान्ति आत्मिक ।
दीदी धन्य विचार, यही तो शुद्ध सात्विक ।। 


 रिश्ते रिसियाते रहे, हिरदय हाट बिकाय ।
परिचित बेगाने हुए, ख़ुशी हेतु भरमाय ।
ख़ुशी हेतु भरमाय, नहीं अंतर-मन देखा।
धर्म कर्म व्यवसाय, बदल ब्रह्मा का लेखा ।
  दीदी का उपदेश, सरल सा चलो समझते ।
दिल में रखे सहेज, कीमती पावन रिश्ते ।।

जिम्मेदारी का वहन, करती बहन सटीक |
मौके पर मिलती खड़ी, बेटी सबसे नीक |
बेटी सबसे नीक, पिता की गुड़िया रानी |
चले पकड़ के लीक, बेटियां बड़ी सयानी |
रविकर का आशीष, बेटियाँ बढ़ें हमारी |
मातु-पिता जा चेत, समझ निज जिम्मेदारी || 


दुःख की घड़ियाँ सब गिनें, घड़ी - घड़ी  सरकाय ।
धीरज हिम्मत बुद्धि बल, भागे तनु विसराय ।
भागे तनु विसराय, अश्रु दिन-रात डुबोते ।
रविकर मन बहलाय, स्वयं को यूँ ना खोते ।
समय-चक्र गतिमान, घूम लाये दिन बढ़िया ।
मान ईश का खेल, गिनों कुछ दुःख की घड़ियाँ ।।


3 comments:

  1. जिम्मेदारी का वहन, करती बहन सटीक |
    मौके पर मिलती खड़ी, बेटी सबसे नीक |
    बेटी सबसे नीक, पिता की गुड़िया रानी |
    चले पकड़ के लीक, बेटियां बड़ी सयानी |

    सुंदर अभिव्यक्ति!!

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  2. बढ़िया निरीक्षण और अभिव्यक्ति भी 1

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