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26 November, 2012

सिंह चतुर्दिक थे खड़े, थे जन-गण के रक्ष-


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आभार वीरुभाई- 

  सिंह चतुर्दिक थे खड़े, बन जन-गन के रक्ष ।
अपने अपने क्षेत्र में, दिखे हमेशा दक्ष ।
दिखे हमेशा दक्ष, लक्ष अवगुण अब आये ।
गीदड़ बनते देख, गधे सत्ता हथियाए ।
ढेंचू ढेंचू रेंक, रैंक ले लेते ऐच्छिक । 
दाने देते फेंक, ताकते सिंह चतुर्दिक ।।





 चित्र 







 चित्र चुरा के भागता, है चालाक असीम ।
कुंडलियों से ले निभा, समझ-बूझ के थीम ।।


2 comments:

  1. सिंह चतुर्दिक थे खड़े, थे जन-गण के रक्ष ।
    अपने अपने क्षेत्र में, दिखे हमेशा दक्ष ।
    दिखे हमेशा दक्ष, लक्ष अवगुण अब आये ।
    गीदड़ बनते देख, गधे सत्ता हथियाए ।
    ढेंचू ढेंचू रेंक, रैंक ले लेते ऐच्छिक ।
    दाने देते फेंक, ताकते सिंह चतुर्दिक ।।

    बन जन गन के रक्ष करके dekhen .

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