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27 November, 2012

पहले फेरे के वचन, पालन-पोषण खाद्य-रविकर

श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता सर्ग-4/सर्ग-5

के अंश 
पहले फेरे के वचन,  पालन-पोषण खाद्य |
संगच्छध्वम मंत्रिता,  मंगल-मंजुल वाद्य ||

 संभृत स्वस्थ समृद्धता, त्रि-आयामी स्वास्थ |
भौतिक तन अध्यात्म मन, मिले मानसिक आथ ||

धन-दौलत संसृष्टि शक्ति, ख़ुशी कदाचित दर्द |
भोगे मिलकर संग में, दोनों औरत-मर्द ||

इक दूजे का नित करें, आदर प्रति-सम्मान |
परिवारों के प्रति रहे, इज्जत एक समान ||

सुन्दर योग्य बलिष्ठ हो,  कीर्तियुक्त संतान |
कहें पाँचवा वचन सुन, बुद्धिमान इंसान ||

शान्ति-दीर्घ जीवन मिले, नहिं भूलें परमार्थ  |
सिद्ध सदा करते रहें, इक दूजे के स्वार्थ ||

रहे भरोसा परस्पर, समझदार-साहचर्य |
प्रेमपुजारी बन रहें, बने रहें आदर्य ||

4 comments:


  1. रहे भरोसा परस्पर, समझदार-साहचर्य |
    प्रेमपुजारी बन रहें, बने रहें आदर्य ||


    रहे भरोसा परस्पर, समझदार-साहचर्य |
    प्रेमपुजारी बन रहें, बने रहें आदर्य ||

    आदर्य शब्द प्रयोग बढ़िया बन पड़ा है .लेकिन समृद्ध कर लें सामृद्ध को

    स्वास्थ और आथ प्रयोग ज़म नहीं रहें हैं .कुछ करें

    स्वास्थ्य /आर्थ्य ?

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  2. १२७ साला कोंग्रेस पर की गई आपकी सौदेश्य टिप्पणियाँ मूल आलेख का हिस्सा बन चुकीं हैं .कृपया देखें .

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  3. आपको पढ़ना सदैव प्रसादपूर्ण होता है।

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  4. रहे भरोसा परस्पर, समझदार-साहचर्य |
    प्रेमपुजारी बन रहें, बने रहें आदर्य ||

    शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .बहुत बढ़िया प्रस्तुति .

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