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11 November, 2012

मिले टके में कुँआ, खनिज मोबाइल टावर

दीप पर्व की
हार्दिक शुभकामनायें

देह देहरी देहरे, दो, दो दिया जलाय-रविकर

किरीट  सवैया ( S I I  X  8 )

झल्कत झालर झंकृत झालर झांझ सुहावन रौ  घर-बाहर ।

  दीप बले बहु बल्ब जले तब आतिशबाजि चलाय भयंकर ।

 दाग रहे खलु भाग रहे विष-कीट पतंग जले घनचक्कर ।

नाच रहे खुश बाल धमाल करे मनु तांडव  हे शिव-शंकर ।।


  दोहा-1

दीवाली का अर्थ है, अर्थजात का पर्व ।
अर्थकृच्छ कैसे करे, दीवाले पे गर्व  ।
अर्थजात = अमीर 
अर्थकृच्छ =गरीब



  कुण्डलियाँ-1
  32 x 365 दिन =11680/-
बत्तीसा जोडूं अगर, ग्यारह नोट हजार ।     
इक पल में वे फूंकते, पर हम तो लाचार ।
पर हम तो लाचार, चार लोगों का खाना ।
मँहगाई की मार, कठिन है दिया जलाना ।
केरोसिन अनुदान, जमाया रत्ती रत्ती ।
इक के बदले चार, बाल-कर रक्खूँ बत्ती ।।

 कुण्डलियाँ-2
लगा टके पर टकटकी, लूँ चमचे में तेल ।
माड़-भात में दूँ चुवा,  करती जीभ कुलेल ।
करती जीभ कुलेल, वहाँ चमचे का पावर ।
मिले टके में कुँआ, खनिज मोबाइल टावर ।
दीवाली में सजा, सितारे दे बंगले पर ।
भोगे रविकर सजा,  लगी टकटकी टके पर ।।
 दोहा-2
 एक लगाए दांव पर, नव रईश अवतार ।
रोज दिवाली ले मना,  करके गुने हजार ।। 

 डोरे डाले आज फिर, किन्तु जुआरी जात ।
गृह लक्ष्मी करती जतन, पर खाती नित मात ।
पर खाती नित मात, पूजती लक्षि-गणेशा ।
पांच मिनट की बोल, निकलता दुष्ट हमेशा  ।
 खेले सारी रात, लौटता बुद्धू भोरे ।
 जेब तंग, तन ढील,  आँख में रक्तिम डोरे ।।





2 comments:

  1. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.सुन्दर प्रस्तुति.
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

    मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..

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