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12 January, 2013

चुप क्यूँ हो पापियों, कहाँ चरती है अक्कल-

 
 काट कपाल धरे कपटी, कटुता हर बार बढ़ावत है ।

भूल गया अघ मानवता, फिर भी नित पाक कहावत है ।

नक्सल भी बम प्लांट करे, शव में अब दुष्ट लगावत है ।

अन्दर बाहर घात हुवे, सरदी सरदार भगावत  है ।




 

नक्सल मारे जान से, फाड़ फ़ोर्स का पेट।
 करवाता बम प्लांट फिर, डाक्टर सिले समेट ।

डाक्टर सिले समेट, कहाँ मानव-अधिकारी ।
हिमायती हैं कहाँ, कहाँ करते मक्कारी ।

चुप क्यूँ हो पापियों, कहाँ चरती है अक्कल ?
 शत्रु देश नापाक, कहाँ का है तू नक्सल ??
Indian bomb plant
सीमा पर उत्पात हो, शत्रु देश का हाथ ।
फेल खूफिया तंत्र है, कटते सैनिक माथ ।
कटते सैनिक माथ, रहे पर सत्ता सोई ।
रचि राखा जो राम,  वही दुर्घटना होई ।
इत नक्सल आतंक, पुलिस का करती कीमा ।
पेट फाड़ बम प्लांट, पार करते अब सीमा ।। 

शब्दों से आक्रोश को, व्यक्त करे आकाश ।
देश रसातल में धंसे, देख लाल की लाश ।
देख लाल की लाश, अनर्गल बकती सत्ता ।
लेकिन पाकी फांस, घुसे हरदम अलबत्ता ।
इत नक्सल दुर्दांत, उधर आतंकी पोसे ।
करिए अब तो क्रान्ति, भावना से शब्दों से ।।


पाकी सिर काटे अगर, व्यक्त सही आक्रोश ।
मरे पुलिस के पेट में, नक्सल दे बम खोंस ।
नक्सल दे बम खोंस, आधुनिक विस्फोटक से ।
करे धमाका ठोस, दुबारा पूरे हक़ से ।
अन्दर बाहर शत्रु, बताओ अब क्या बाकी ।
नक्सल पीछे कहाँ, तनिक आगे है पाकी ।।

पाकी दो सैनिक हते, इत नक्सल इक्कीस ।
रविकर इन पर रीस है, उन पर दारुण रीस ।
उन पर दारुण रीस, देह क्षत-विक्षत कर दी ।
सो के सत्ताधीश, गुजारे घर में सर्दी ।
बाह्य-व्यवस्था फेल, नहीं अन्दर भी बाकी ।
सीमोलंघन खेल, बाज नहिं आते पाकी ।। 
आई मौनी अमाँ है, तमा तमीचर तीर |
नारी मरती सड़क पर, सीमा पर बलवीर |
सीमा पर बलवीर, देश में अफरा तफरी |
सत्ता की तफरीह, जेब लोगों की कतरी |
बेलगाम है लूट, समंदर पार कमाई |
ढूँढ़ दूज का चाँद, अमाँ यह लम्बी आई || 

2 comments:

  1. अन्दर बाहर घात हुवे, सरदी सरदार भगावत है । वाकई देश गुस्से में हैं लेकिन हुक्मरान है कि चुप बेठे हैं !!

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  2. ✿♥❀♥❁•*¨✿❀❁•*¨✫♥
    ♥सादर वंदे मातरम् !♥
    ♥✫¨*•❁❀✿¨*•❁♥❀♥✿


    आदरणीय रविकर जी
    मन को झकझोर देने वाली आपकी इन रचनाओं के लिए क्या कहा जाए ...
    सादर नमन !

    अंधे-बहरे प्रशासकों तक आपके शब्द पहुंचे तो शायद उनको कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरणा मिले ...
    साधुवाद !!


    हार्दिक मंगलकामनाएं …
    लोहड़ी एवं मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर !

    राजेन्द्र स्वर्णकार
    ✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿◥◤✿✿◥◤✿

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