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13 January, 2013

शब्द यूज कन्फ्यूज, गालियाँ साथ खा रहे -




  जली दिमागी बत्तियां, किन्तु हुईं कुछ फ्यूज ।
बरबस बस के हादसे, बनते प्राइम न्यूज ।

बनते प्राइम न्यूज, व्यूज एक्सपर्ट आ रहे ।
शब्द यूज कन्फ्यूज, गालियाँ साथ खा रहे ।

सड़ी-गली दे सीख, मिटाते मुंह की खुजली ।
स्वयंसिद्ध *सक सृज्य , गिरे उनपर बन बिजली ।।
 *शक्ति


 मर्यादित वो राम जी, व्यवहारिक घनश्याम ।
देख आधुनिक स्वयंभू , ताम-झाम से काम ।

ताम-झाम से काम-तमाम कराते राधे ।
राधे राधे बोल, सकल हित अपना साधे ।

बेवकूफ हैं भक्त, अजब रहती दिनचर्या ।
कर खुद गीता  पाठ, रोज ही जाकर मर-या ।

4 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 16/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बढ़िया व्यंग्य-बान!
    ~सादर!!

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  3. ताम-झाम से काम-तमाम कराते राधे ।
    राधे राधे बोल, सकल हित अपना साधे ।

    बेवकूफ हैं भक्त, अजब रहती दिनचर्या ।
    कर खुद गीता पाठ, रोज ही जाकर मर-या ।

    और ये भी देखिये अचानक बलात्कार की खबरें बड़े बड़े अखबारों की पहली खबर बनने लगीं हैं .लगवाई जातीं हैं ये खबरें पैसे देकर पहली खबर के रूप में .



    .आपकी सद्य टिप्पणियों के लिए

    आभार .

    मुबारक मकर संक्रांति पर्व .

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