26 January, 2013

अनुशंसा-तारीफ़, तनिक करना भी जानो-

विद्वानों की टोलियाँ, *बतर बोलियाँ बोल ।
करें कलेजा तर-बतर, पोल-पट्टियाँ खोल ।

पोल-पट्टियाँ खोल, झोल इसमें है लेकिन ।
नौसिखुवे हों गोल, हुवे हैं जिनको दो दिन ।

अनुशंसा-तारीफ़, तनिक करना भी जानो ।
अनजाने तकलीफ, नहीं दो हे!  विद्वानों ।।
*बुरी 

9 comments:

  1. बहुत खूब सर जी .चक्कू छुरियाँ चलने लगीं हैं कुछ के कलेजे पे .सांप भी लौटेंगे अभी .छोड़ना नहीं है इन सेकुलरों को .

    ReplyDelete
  2. देश के 64वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    --
    आपकी पोस्ट के लिंक की चर्चा कल रविवार (27-01-2013) के चर्चा मंच-1137 (सोन चिरैया अब कहाँ है…?) पर भी होगी!
    सूचनार्थ... सादर!

    ReplyDelete
  3. मित्र, गणतन्त्रदिवस की हार्दिक शुभकामना के साथ-
    आप की रचनाओं की शहद पगी कटु औषधि के समाण मीठी कुंडलियों की चोट सराहनीय होप्ती है |

    ReplyDelete
  4. उम्दा प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई...६४वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं...

    ReplyDelete
  5. करारा वार ,उत्कृष्ट प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  6. सही कहा तारीफ भी होनी चाहिये । सुंदर प्रस्तुति ।

    ReplyDelete