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08 April, 2013

छत्ता जैसा देश, बनाते मधु-कॉलोनी -

कॉलोनी मजदूर की, रानी है मगरूर । 
मधु खाते सामन्त-कुल, कुल घमंड में चूर । 

कुल घमंड में चूर, यहाँ *खट-मरते मुर्गे । 
अंडे खाए अन्य, दरोगा नेता गुर्गे । 

बेचारे मजदूर, झेलते हैं अनहोनी । 
छत्ता जैसा देश, बनाते मधु-कॉलोनी ॥ 
*मेहनत करके

7 comments:

  1. सुन्दर और सटीक कुंडलियाँ !!
    आभार माननीय !!

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  2. वाह वाह रविकर ये देश मधुमख्खी के छत्ते की तरह हैं .रानी मख्खी रिमोट है मजदूरन आम आदमी आदमीं है .

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  3. बेहतरीन स्टिक कुण्डलियाँ गुरुदेव,आभार.

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  4. बधाई सात किलोग्राम तौल घटाने पर .इसे भी ट्राई करें चीनी के स्थान पर न्यूट्री वेल्यु स्टीविया इस्तेमाल करें .(एस टी ई वी आई ऐ बोले तो स्टीविया ,कुदरती सूखी हुई पट्टियां हैं ये जो एक चुटकी डालनी हैं उबलते पानी में चाय बनाते वक्त चीनी के स्थान पर .यह औषधीय वनस्पति चीनी से २५ - ३० गुना ज्यादा मीठी है .

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  5. वन्धुवर,आज ऐसी ही रचनाओं की ज़रूरत है |कभी न कभी 'आवाज़' हलचल अवश्य पैदा करेगी |

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    सादर

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