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02 June, 2013

घटे रेप के आंकड़े, किन्तु बढे छल-छंद-

सहमति से सम्भोग तक, फिर फक्कड़ फरिफंद ।
घटे रेप के आंकड़े, किन्तु बढे छल-छंद ।

किन्तु बढे छल-छंद,  मिशन पटना बहकाए।
 बने सख्त-कानून, बालिका माँ बन जाए ।

जब बेटे बिगलैड़, कांड कांडा सर-कंडा । 
ख़ुशी करे ख़ुदकुशी, कहाँ कुछ करता डंडा ॥

6 comments:

  1. भाई बहुत दिनों बाद देख रहा हूं आपको, लगता है कहीं बाहर थे।
    शानदार छंद, बहुत सुंदर

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  2. main bhi yahi soch rahi thi ki garmi ki chhuttiyon me wayast hain shayad ....very nice ....

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  3. सटीक कुंडलियाँ !!
    आपकी कमी काफी दिन से अखर रही थी अब वो पूरी हुयी !!
    सादर आभार !!

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  4. सटीक कुण्डलिया। वर्तमान पर चोट करती, प्रभावशाली रचना !

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