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31 August, 2013

जाट-देवता की 39 वीं वर्षगाँठ : 31 अगस्त को

मेरी हार्दिक बधाई  || 
संदीप जी का परिचय :
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"भोजदेव"  के  "धार" से,  मालव-महिमा  धार |
"शबगा"  में आकर जमे, "व्याघ्र-प्रस्थ" आगार ||
 पिता भारतीय थलसेना में जाट रेजीमेंट में थे।
सेना में रहते हुए दो बार पाकिस्तान से युद्द में शामिल हुए। जिसमें एक बार
एक पाकिस्तानी गोली मेरे पिता की छाती के  बीचोबीच से आर-पार हो गयी थी।
हमें दोनों तरफ का निशान दिखाया करते थे,
फौजी   कालू  राम  जी,   देश-भक्त  परिवार |
यमुना तट पर कृष्ण सा,  पाया  स्नेह-दुलार||

देवी  माँ  सन्तोष   के,  हृदय  का टुकड़ा एक |
ब्लाग-जगत हर्षित हुआ,  पाया  बन्दा  नेक ||




रीना संग  माला बनी,  मणिका  बड़ी पिरोय |
पुत्र  पवित्र  के संग में,   आँगन  पावन  होय ||


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शुभकामनाएं

अक्कड़-बक्कड़  बम्बे-बो, 
अस्सी    नब्बे    पूरे    सौ ||

अक्षय  और  अनंत  ऊर्जा  का, 
शाश्वत   भण्डार   सूर्य  हो |
मत्स्य-भेदते द्रुपद-सुता के, 
स्वप्नों के प्रिय-पार्थ-पूर्य हो || 

सुबह महाशिवरात्रि पर गंगा जल चढाने के लिए लम्बी लाइन
घुमक्कड़ी   के   संदीपक  हो,  
मित्रों  ने  पाया  उजियारा |


परिक्रमा  सारी  दुनिया  की, 
दुर्गम-दुर्धुष  सा  व्रत  धारा ||
पञ्चम-स्वर की चार-श्रुति में, 
तीजी श्रुति संदीपन से तुम | 
सागर सर नद तट कौतूहल, 
मठमंदिर वन-उपवन से तुम ||

पर्वत  के  उत्तुंग-शिखर  पर, 
मानवता  का  ध्वज  फहराते |
तप्त-मरुस्थल  पर  गर्वीले, 
अपने  विजयी  कदम  बढाते ||
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प्रकृति सुंदरी के दर्शन हित, 
निकल पड़ें जैसे  फटती पौ |
अक्कड़ - बक्कड़  बम्बे-बो,  
अस्सी    नब्बे    पूरे    सौ ||


जाट - देवता   से  सदा,  रहिएगा   हुसियार |
जाट-खोपड़ी  क्या  पता,  कब  कर देवे मार | 
  कब   कर   देवे   मार,  हाथ  माँ  डंडा  साजे  | 
 मिले  न  दुश्मन  तो,  दोस्त  का बाजा बाजे || 
लो "रविकर" पर जान, जान  देने  की  बारी |
मित्रों  पर  कुरबान,  रखे    पक्की   तैयारी ||

1 comment:

  1. गुरुवर आपका अंदाज निराला है। नमस्कार

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