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19 August, 2013

कह गरीब के साथ, हाथ नित बम्बू ठोके-

 (1)
रोके से ना रोकड़ा, ले रुकने का नाम ।
रुपिया रूप कुरूप हो, मचा रहा कुहराम । 

मचा रहा कुहराम, हुआ अब राम भरोसे । 
मँहगाई की मार, गरीबी जीवन कोसे । 

कह गरीब के साथ, हाथ नित बम्बू ठोके । 
डालर हँसता जाय, रहे पर रुपिया रो के ॥ 

3 comments:

  1. रुपया बकरे और उसकी अम्मा को लेके डूबेगा आखिर अम्मा बकरे की कब तक खैर मनायेगी .मिमियाता रहा है एक बकरा सारा देश में बीच बीच में मेंह मेंह भी बोलता है बे -मतलब .

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  2. सही है,
    बढिया प्रस्तुति

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  3. पता नहीं अब किस की उम्र तक जा के रुकेगा ये रुपया ...
    मस्त, चुटीला छंद ...

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