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04 September, 2013

रविकर रह चैतन्य, अन्यथा उघड़े बखिया -

बखियाने से साड़ियाँ, बने टिकाऊ माल | 
लेकिन खोंचा मार के, कर दे दुष्ट बवाल |

कर दे दुष्ट बवाल, भूख नहिं देखे जूठा |
सोवे टूटी खाट, नींद का नियम अनूठा |

खोंच नींद तन भूख, कभी भी देगा लतिया |
रविकर रह चैतन्य, अन्यथा उघड़े बखिया ||

7 comments:

  1. रविकर रह चैतन्य, अन्यथा उघड़े बखिया ||

    आनंद दायक !

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  2. अनमोल दोहे
    बहुत ही सुन्दर लाज़वाब
    सादर

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  3. बखिया उघड़ ही रही है।

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  4. कविताओं के तो शिरोमणि हैं आप..बेहतरीन प्रस्तुति।।।

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  5. सुन्दर लिखी लिखाड़ लिंक पे सारी पतियाँ ....

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