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02 November, 2013

पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक-रविकर


पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||


ली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी 
पावली=चवन्नी 

गावदी = मूर्ख / अबोध

6 comments:

  1. सर आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ
    नया प्रकाशन --: दीप दिल से जलाओ तो कोईबात बन

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  2. एक गावदी की ओर से :)

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  3. वाह! क्या बात है! फिर आई दीवाली
    आपको दीपावली की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  5. अवध उस स्थान कहते हैं जहां किसी का वध न हो .लेकिन ये अवध नरेश के समय की बात है अब तो वहाँ सेकुलर प्रेत रहते हैं सरकार में .सुन्दर प्रस्तुति .मान्यवर अपनी मेल चेक करें .

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  6. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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