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12 December, 2013

कारें चलती देश में, भर डीजल-ईमान-

(1)
कारें चलती देश में, भर डीजल-ईमान |
अट्ठाइस गण साथ पर, नहिं व्यवहारिक ज्ञान |

नहिं व्यवहारिक ज्ञान, मन्त्र ना तंत्र तार्किक |
*स्नेहक पुर्जे बीच, नहीं ^शीतांबु हार्दिक |
*लुब्रिकेंट  ^ कूलेंट 

गया पाय लाइसेंस, एक पंजे के मारे |
तो स्टीयरिंग थाम, चला दिखला सर-कारें ||
(2)
नकारात्मक गुण छिपा, ले ईमान की आड़ । 
व्यवहारिकता की कमी, दुविधा रही बिगाड़ । 

दुविधा रही बिगाड़,  तर्क-अभिव्यक्ति जरुरी । 
अभी अपेक्षा आप, करो दिल्ली की पूरी । 

पानी बिजली सहित, प्रशासन स्वच्छ सकारा । 
वायदे करिये पूर, अन्यथा कहूं नकारा ॥ 
   



(3)

 खरी खरी रख तथ्य कुल, करें व्याख्या आप |
दिल्ली में जब आपका, पसरा प्रबल प्रताप |

पसरा प्रबल प्रताप. परख बड़बोले बोले |
किन्तु केजरीवाल, विधायक क्षमता तोले |

पचा सके ना जीत, जीत से मची खरभरी |
लफुआ अनुभवहीन, चेंगडे करें मसखरी ||

9 comments:

  1. ताजा भंवर है, इसमें सभी की टांगें घुसी हुईं हैं।

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  2. भारतीय राष्ट्रीय चरित्र कैसे बदले :) ?

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-12-13) को "वो एक नाम (चर्चा मंच : अंक-1461)" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!!

    - ई॰ राहुल मिश्रा

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  4. करारा और तीक्ष्ण व्यंग , बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  5. sabhi dohe behatareen lagi samyikta ke sath sasakt prastuti bahut bahut aabhar ravi ji .

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