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12 January, 2014

यह मीडिया इवेन्ट, लगाए झटका तगड़ा-

पड़ा साबका सड़क से, सबक सीखते आम |
इंतजाम पहले करो, फिर भेजो पैगाम |

फिर भेजो पैगाम, नाम ना आप डुबाओ |
कोशिश में ईमान, बाज हड़बड़ से आओ |

यह मीडिया इवेन्ट, लगाए झटका तगड़ा |
बढ़ा और नैराश्य, फाड़ते रविकर कपड़ा  ||



आड़े अनुभवहीनता, पब्लिक थानेदार । 
भीड़ अड़ी भगदड़ बड़ी, भाड़े जन-दरबार । 

 भाड़े जन-दरबार, नहीं व्यवहारिक कोशिश । 
चूके फिर इस बार, कौन कर बैठा साजिश । 

दूर हटे अरविन्द, आज छवि आप बिगाड़े । 
धीरे धीरे सीख, समय आयेगा आड़े । 

नीति नियम नीयत सही, सही कर्म ईमान |
सही जाय ना व्यवस्था, सी एम् जी हलकान |

सी एम् जी हलकान, बिना अनुभव के गड़बड़ |
बार बार व्यवधान,  अगर मच जाती भगदड़ |

आशंकित सरकार, चलो खामी तो मानी|
चेतो अगली बार, नहीं दुहरा नादानी || 
  

5 comments:

  1. वाह ... गज़ब कटाक्ष अदा ...

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  2. देखिए, देखते रहिए।

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  3. काफी उम्दा प्रस्तुति.....
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (14-01-2014) को "मकर संक्रांति...मंगलवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1492" पर भी रहेगी...!!!
    - मिश्रा राहुल

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