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05 January, 2014

मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार-

चली मिटाने सब्सिडी, भ्रष्टाचारी कोढ़ । 
माल मुफ्त में काट के, घी पी कम्बल ओढ़ ।। 

पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार । 
मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार॥ 

तोड़ी झुग्गी झोपड़ी, खोदे बड़े पहाड़ । 
घूम चुकी है खोपड़ी, फिर भी रहा दहाड़ ॥ 

दक्षिण-पंथी घूरते, हर्षित दीखे वाम । 
कांग्रेसी संतुष्ट हैं, देख आप का काम ॥ 

बहुत बहुत शुभकामना, बना रहे ईमान । 
कर मुस्लिम से दोस्ती, हिन्दू का भी ध्यान ॥ 


7 comments:

  1. बढिया, बहुत सुंदर

    दक्षिण-पंथी घूरते, हर्षित दीखे वाम ।
    कांग्रेसी संतुष्ट हैं, देख आप का काम ॥

    क्या बात है..

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  2. काफी उम्दा रचना....बधाई...
    नयी रचना
    "अनसुलझी पहेली"
    आभार

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  3. बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. बहुत सुन्दर ......

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  5. बेहद की उत्कृष्ट प्रासंगिक व्यंग्य रचना

    मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार-
    चली मिटाने सब्सिडी, भ्रष्टाचारी कोढ़ ।
    माल मुफ्त में काट के, घी पी कम्बल ओढ़ ।।

    पाक चाहता आप की, सेंटर में सरकार ।
    मिले मुफ्त कश्मीर फिर, जम्मू अगली बार॥

    तोड़ी झुग्गी झोपड़ी, खोदे बड़े पहाड़ ।
    घूम चुकी है खोपड़ी, फिर भी रहा दहाड़ ॥

    दक्षिण-पंथी घूरते, हर्षित दीखे वाम ।
    कांग्रेसी संतुष्ट हैं, देख आप का काम ॥

    बहुत बहुत शुभकामना, बना रहे ईमान ।
    कर मुस्लिम से दोस्ती, हिन्दू का भी ध्यान ॥

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