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30 June, 2014

बनी मौत महबूब, तेल में खून मिलाया-

मारामारी मचा के, खले खलीफा खूब । 
लगे लाश पर ठहाके, अहंकार में डूब ।

अहंकार में डूब, देश इक नया बनाया। 
बनी मौत महबूब, तेल में खून मिलाया

पर भारत बेचैन, चला चाबुक सरकारी ।
मँहगा होता तेल, कार ना चले हमारी ।

8 comments:

  1. मित्र ! लम्बी बीमारी के बाद स्वस्थ हो कर कल से आप सब के साथ हूँ ! बहुत अरसे के बाद कुण्डलिया का लाभ मिला !

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  2. पुरानी लय आ गई लौट कर :)

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  3. बहुत सुन्दर और सटीक...

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  4. हास्य के साथ वीबह्ट्स और गंभीर रसों का बेजोड़ समागम है !

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  5. वाह मज़ा आ गया ... सरकार का तो चाबुक अभी और चलने वाला है ...

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