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21 January, 2016

छोड़ भगे बग़दाद, किन्तु ना जाय मदीना-

दीनारों के देश से, नारों की आवाज |
बने मुहाजिर जा रहे, ज्यादा विकसित राज |

ज्यादा विकसित राज, जहाँ पर लोक-तंत्र है |
फैलाना इस्लाम, यही तो मूल-मन्त्र है |

एक हकीकत और, वहाँ पर मुश्किल जीना |
छोड़ भगे बग़दाद, किन्तु ना जाय मदीना ||

1 comment:

  1. बहुत सत्य कहा है सर आपने...

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