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01 February, 2016

कह रविकर कविराय, पचे सुख भोजन पैसा

पैसा भोजन सुख पचे, सही रहेंगे आप |
अहंकार चर्बी बढ़े, बढ़े अन्यथा पाप |  

बढ़े अन्यथा पाप, भूख तोड़े मर्यादा |
मानवता विसराय, बढ़े गर पैसा ज्यादा |

अचना पचना ठीक, बना लो जीवन ऐसा |
कह रविकर कविराय, पचे सुख भोजन पैसा ||

1 comment:

  1. पचने पचाने की वो सोचें जो जमा किया खा पायें
    खाने की किसे पड़ी जमा पर जमा किये जो जायें ।

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