Follow by Email

04 September, 2016

भली करेंगे राम, भाग्य की चाभी थामे


(1)
माने मूरख स्वयं को, यदि मूरख इंसान। 
निश्चय ही वह बन सके, मूरख से विद्वान्। 
मूरख से विद्वान्, सुनी हैं कई कथाएं।
लेकिन यदि विद्वान्, स्वयं को विज्ञ बताएं।
कह रविकर विद्वान, उक्ति कह गये सयाने।
बन सकता वह मूर्ख, बदल फिर जाए माने।।

(2)
ताले की दो कुंजिका, कर्म भाग्य दो नाम।
मानव तू तो कर्म कर, भली करेंगे राम।
भली करेंगे राम, भाग्य की चाभी थामे।
रिद्धि सिद्धि समृद्धि, तिजोरी तेरे नामे।
रविकर तू तो खोल, कहाँ प्रभु रुकने वाले।
मिले कर्म से भाग्य, कुंजिका खोले ताले।।

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (06-09-2016) को "आदिदेव कर दीजिए बेड़ा भव से पार"; चर्चा मंच 2457 पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को नमन।
    शिक्षक दिवस और गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete