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06 November, 2017

खिचड़ी

अमीरी में गरीबी में बराबर ही पली खिचड़ी।
तभी तो देश को लगती हमेशा ही भली खिचड़ी।
लिया जब पूर्व से चावल, नमक घी तेल पश्चिम से।
मिलाया दाल उत्तर की, मसाला मिर्च दक्षिण से।

उड़ीसा ने दिया हल्दी, करी पत्ता दिया केरल।
लिया पंजाब का पानी, पतीले में पके पल पल।।
समन्दर पार भारत से निकलकर अब चली खिचड़ी।
अमीरी में गरीबी में बराबर ही पली खिचड़ी।।

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (07-11-2017) को
    समस्यायें सुनाते भक्त दुखड़ा रोज गाते हैं-; 2781
    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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