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04 February, 2018

मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर-

किसी की राय से राही पकड़ ले पथ सही अक्सर।
मगर मंज़िल नही मिलती, बिना मेहनत किए डटकर।
तुम्हें पहचानते होंगे प्रशंसक, तो कई बेशक
मगर शुभचिंतकों की खुद, करो पहचान तुम रविकर।।

बहस माता-पिता गुरु से, नहीं करता कभी रविकर |
अवज्ञा भी नहीं करता, सुने फटकार भी हँसकर।
कभी भी मूर्ख पागल से नहीं तकरार करता पर
सुनो हक छीनने वालों, करे संघर्ष वह डटकर।।

गगन जब साफ़-सुथरा तो कुशल पायलट' नहीं बनते।
सड़क दुर्गम अगर है तो भले ड्राइवर' वहीं बनते।
नहीं यूँ जिंदगी चलती, कहीं ठोकर कहीं गड्ढे

तनिक जोखिम उठाते जो वहीं इंसाँ सही बनते।।

भला क्या चाहते बनना बड़े होकर, बताओ तो।
यही तो प्रश्न सब पूछें, कभी नजदीक जाओ तो।
बुढापा आज ले आया, अनोखे प्रश्न का उत्तर।

बड़े होकर बनूँ बच्चा, चलो मुझको बनाओ तो।।

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