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21 March, 2012

काटे पादप रोज, हरेरी अपनी भाये--

भाये ए सी की हवा, डेंगू मच्छर दोस्त ।
फल दल पादप काटते, काटे मछली ग़ोश्त ।

काटे मछली ग़ोश्त, बने टावर के जंगल ।
टूंगे जंकी टोस्ट, रोज जंगल में मंगल ।

खाना पीना मौज, मगन मनुवा भरमाये ।
काटे पादप रोज, हरेरी ज्यादा भाये ।।

17 March, 2012

तन मन को देती जला, रहा निकम्मा ताप-

रमिया का एक दिन.... (महिला दिवस के बहाने)


रमिया खटती रात-दिन, किन्तु मियां अभिशाप।
तन-मन देती वह जला, रहा निकम्मा ताप ।  

रहा निकम्मा ताप, बाप बनता ही रहता ।
तीन ढाक के पात, खुदा की नेमत कहता |

पीता दारू रोज, निकाले हर दिन कमियां |
सहती जाए बोझ, रहे चुप लेकिन रमिया ||

03 March, 2012

तीन समाचार

पटना से सुशील मोदी
प्रसव करे पीड़ा सहे, रक्त दूध से पाल ।
नसबंदी की बात पर, होती रही हलाल ।
होती रही हलाल, पुरुष पौरुष दिखलाओ  ।
पांच मिनट का काल, चलो अब आगे आओ ।
मोदी की यह बात, करे खारिज नर-कीड़ा ।
मौज करे दिन रात,  सहे बस नारी पीड़ा ।।

जहानाबाद से दबंग -
काटे हाथ दबंग ने, पी एम सी एच नेक ।
पड़ा फर्श पर तड़पता, गए गाँव में फेंक ।
गए गाँव में फेंक, होय आशंका  भारी ।
नक्सल बने अनेक, किया लेकिन हुशियारी ।
उठे नहीं गन बम्ब, पोस्टर कैसे साटे ।
सके न नक्सल बन , हाथ दोनों जो काटे ।।  

धनबाद से अघोरी
पानी की किल्लत बढे, फिर दादा इस साल ।
होली में डी सी कहे, खेलो शुष्क गुलाल ।
खेलो शुष्क गुलाल, तिलक माथे पर लागे ।
बदलो अपनी चाल, कठिन दिन आये आगे ।
किन्तु अघोरी-छाप, बात उनकी ना माने ।
 सर्दी से अब तलक, गया जो नहीं नहाने ।।
 

23 January, 2012

नारी मन इन नार्वे--

 न्यूज़-नार्वे सरकार ने भारतीय माँ बाप से बच्चे छीने !!

नारी मन इन नार्वे,  तन है एक मशीन ।
नर-नारी तन भारती, दीन हीन गमगीन ।

दीन हीन गमगीन, दूर से ताको बच्चा।
 छीनेगी सरकार, करे गर करतब कच्चा  ।

साथ सुलाए बाप, खिला दे गर महतारी ।
गलत परवरिश भांप, रोय नर हारे नारी ।।


भारत की नारी करे, पल-पल अद्भुत त्याग ।
थपकी देकर दे सुला, दुग्ध अमिय अनुराग।

दुग्ध अमिय अनुराग, नार्वे की महतारी ।
पुत्र सोय गर साथ, नींद बिन रात गुजारी ।

कह रविकर परवरिश, सदा ही श्रेष्ठ हमारी।
ममता से भरपूर, पूज भारत की नारी ।।

21 October, 2011

पतित-उधारन बहन, बनी जो निर्मल-गंगा

मुंबई ।। अपनी नव विवाहिता पत्नी को धोखे से वेश्यालय में बेचने की कोशिश कर रहे एक शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पति की कुटिल चालों से अनजान पत्नी को वहां की कॉल गर्ल्स ने ही बचाया---
पतित-पतंगा यह पती, धरती पर बड़-बोझ |
ऐसे  कुत्तों  को करें,  अल्लाह-मियां  सोझ |

अल्लाह-मियां सोझ,  कुकर्मी फल पायेगा |
मिली बहन अनजान, खुदा खुशियाँ लाएगा |

पतित-उधारन बहन,  बनी जो निर्मल-गंगा |
उसका जीवन धन्य,  सड़ेगा पतित-पतंगा ||

05 October, 2011

दस सिर सहमत नहीं रहे थे |

 लंका-नगरी बैठ दशानन त्रेता में मुस्काया था |
बीस भुजाओं से सिर सारे मन्द मन्द सहलाया था ||
सीता ने तृण-मर्यादा का जब वो जाल बिछाया था-
बाँये से पहले वाला सिर बहुत-बहुत झुँझलाया था |
ब्रह्मा ने बाँधा था ऐसा, कुछ  भी  ना  कर पाया था |
 असंतुष्ट  हो  वचन  सहे  थे |
दस सिर सहमत नहीं रहे थे ||
[2.jpg]
दहन देख दारुण दुःख लंका दूजा मुख गुर्राया था |
क्षत-विक्षत अक्षय को देखा गला बहुत भर्राया था |
अंगद के कदमों के नीचे तीजा खुब  अकुलाया था |
पैरों ने जब भक्त-विभीषण पर आघात लगाया था |
बाएं से चौथे सिर ने नम-आँखों, दर्द  छुपाया था-
भाई   ने   तो   पैर   गहे   थे |
दस सिर सहमत नहीं रहे थे ||
सहस्त्रबाहु से था लज्जित दायाँ वाला पहला सिर |
दूजे  ने  रौशनी  गंवाई  एक आँख  बाली  से घिर |
तीजा तो बचपन से निकला महादुष्ट पक्का शातिर |
मन्दोदरी से चौथा चाहे  बातचीत हरदम आखिर |
पर  सबके  अरमान  दहे  थे |
दस सिर सहमत नहीं रहे थे ||
File:Sita Mughal ca1600.jpg[bhrun-hatya_417408824.jpg]
शीश नवम था चापलूस बस दसवें की महिमा गाये |
दो पैरों  के, बीस  हाथ  के,  कर्म - कुकर्म  सदा भाये |
मारा रावण राम-चन्द्र ने, पर फिर से वापस आये |
नया  दशानन  पैरों  की  दस  जोड़ी  पर सरपट धाये |
दसों दिशा में बंटे शीश सब, जगह-जगह रावण छाये -
सब सिर के अरमान लहे थे |
दस सिर सहमत नहीं रहे थे ||
http://upload.wikimedia.org/wikipedia/en/c/ce/Mohammed_Ajmal_Kasab.jpg Train inferno: Burning oil tankers after a tanker train caught fire following derailment near Chanmana village between
Aluabari and Mangurjaan railway stations in Kishanganj district of Bihar on Wednesday.

30 August, 2011

उत्तर प्रदेश पुलिस लाश गाडी से इस तरह वसूली करती है |

ओमपुरी  से  हो  खफा, मांसाहारी दोस्त |

 कल से खाना छोड़ते, वे मुर्दों का ग़ोश्त |4|

ताज़ा ग़ोश्त

लो क सं घ र्ष !   पर  मेरी  टिप्पणी 

 

कोतवाल ने रोक ली, इक गरीब की लाश |
कोचवान से मांगता,  खाने को कुछ मांस |

खाने को कुछ मांस, राम-लखन का वास्ता |
अखिलेश्वर भी  नहीं, कराता  उन्हें नाश्ता |

पर माया तू जान ,  न गली पुलिस की दाल |
अन्नाजन को देख,   दुम दाब भगा कुत्त्वाल || 

Dog wearing jeans and top

08 May, 2011

इस इक्कीस क़यामत है, भ्रामक है अति भ्रामक है

सब घबराहट  नाहक है, धरती बड़ी  नियामक है
इस  इक्कीस  क़यामत है, भ्रामक है अति भ्रामक है
            पावन पुस्तक का आधार, लेकर उल्टा-पुल्टा सार
            ऐसे खोजी  को धिक्कार, करते भय का कटु-व्यापार,
            गर इसपर विश्वास अपार, नहीं  पंथ का दुष्प्रचार
            करके  पक्का सोच-विचार, खुद को ले जल्दी से मार
जो आनी सचमुच शामत है, इस  इक्कीस  क़यामत है
भ्रामक है अति भ्रामक है, धरती बड़ी  नियामक है
            सर्दी इधर उधर बरसात, घटते दिन तो बढती रात
            लावा से हो सत्यानाश,  बढती फिर जीने की आस
            तेल उगलती तपती रेत, बन जाते  उपजाऊ  खेत 
            करे संतुलित सारी चीज, अन्तर्निहित रखे हर बीज
            पाप हमारे करती माफ़,  बाधाओं को करती साफ़ 
सब घबराहट  नाहक है, धरती बड़ी  नियामक है
इस  इक्कीस  क़यामत है, भ्रामक है अति भ्रामक है 

और आज २३ मई है----कल पूरे उत्तर-भारत में 
गरजी बिजली बादल छाये, अन्धड़ और बवंडर आये,   
पेड़  उखाड़े  भवन  ढहाये, ओले  भी  कोहराम मचाये
जीव-जंतु जब जान गवायें, दहशत से मानव घबराए 
पर पूरी धरा सलामत है----(http://pittpat.blogspot.com/ के टिप्पणी से )
सब   घबराहट   नाहक  है,  धरती  बड़ी  नियामक है
इस  इक्कीस  क़यामत है, भ्रामक है अति भ्रामक है 

 

24 March, 2011

गुल का अर्थ है- केवल दाग

रे पुष्पराज-
सुगंध तेरी पा
सम्मोहित सी मैं
कर कांटो की अनदेखी 
आत्मविश्वास से लबरेज 
तेरे पास आ गई -
और धोखा  खा गई .
तूने छल-कपट से 
धर-पकड़ कर 
गोधूलि के समय 
कैद कर लिया 
व्यभिचार भी किया 
सुबह होने पर धकेल दिया 
कटु-सत्य !
तू तो महा धूर्त है.
मद-कण से युक्त महालोलुप है .
तेरे गुल का अर्थ है-
केवल दाग
सरसों का सौंदर्य देख-
संसार को देता है सुगंध  और स्वाद