Showing posts with label बुजुर्ग. Show all posts
Showing posts with label बुजुर्ग. Show all posts

21 September, 2013

देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें -

कुण्डलियाँ छंद

जन्नत बन जाए जहाँ, बसते बाल-बुजुर्ग ।
इनके रहमो-करम से, देह देहरी दुर्ग ।

देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें ।
इनका अनुभव ज्ञान, टाल दे सकल बलाएँ ।

हाथ परस्पर थाम, मान ले रविकर मिन्नत ।
बाल-वृद्ध सुखधाम, बनायें घर को जन्नत।।