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12 February, 2018

पत्नी-पीड़ित संघ का प्रतिवेदन


बच्चों को नहला धुला, करता हूँ तैयार। 
फिर भी नहला पर रही, बीबी दहला मार।।
रहे पड़ोसी तभी कुँवारा।

पति पहली तारीख पर, पाता छप्पन-भोग।
भोग रहा फिर माह भर, कर कर गृह उद्योग।।
हाय हाय रे पति बेचारा।

दही जमाना छोड़ के, रही जमाती धाक।
रहा जमाना देखता, रविकर की औकात।।
दैव दैव आलसी पुकारा।

गलती पर गलती करे, करे बहाना नित्य।
नही दाल गलती अगर, अश्रु बहाना कृत्य।।
दिखला देती दिन में तारा।


26 March, 2012

अरबपति पल में हुए, विकसित हिदुस्तान -

सुबह सुबह आई खबर, एक अरब इन्सान ।
होते पल में अरबपति, विकसित हिदुस्तान ।

विकसित हिदुस्तान, इलेक्शन आया भैया ।
दलित-व्यथित अलगान, मिले माया न मैया ।

मुद्दे जाते बदल, बदलते नारे भाई ।
नेता गए सँभल, गरीबी भी विसराई ।।

21 July, 2011

अब घर ३६- गढ़ हुआ--

टुकड़े-टुकड़े हो चुका,  अपना  बड़ा  कुटुम्ब, 
पाक, बांगला ब्रह्म बन, लंका से जल-खुम्ब || 


अब घर छत्तिसगढ़ हुआ, चंडीगढ़ से दूर ,
बना पांडिचेरी सरिस, बिखरा घर भरपूर ||

झारखण्ड बन जिन्दगी, उगे हृदय में शूल,
खनिज सम्पदा तो बहुत,  बाढ़े  किन्तु  बबूल ||
(नक्सल विचार )


नैनों  के  सैलाब  से,  कोसी   करती  रोष,
बाढ़ प्रबन्धन में बहा, सब बिहार का कोष ||
(आंसुओं में सब बह गया )

घोर उड़ीसा हो गया, सूख-साख जल स्रोत्र,
पानी की खातिर करूँ,  मान-मनौवल होत्र ||
(सम्मान के लिए मान-मनौवल )

काश्मीर  किस्मत  हुई, डाका  डाले  पाक,
ख़त्म हुई इज्जत गई,  बन जम्मू-लद्दाक ||
(J & K  में केवल घाटी की  ही इज्जत / मोहल्ले में केवल उनकी )

बादल  सा  दिल फट गया,  बहा  उत्तराखंड,
हुआ नहीं बर्दाश्त फिर, दिल्ली का पाखण्ड ||
(बादल फटने के बाद हुई तबाही, हाई-कमान केवल पाखण्ड करे )

उम्मीदी गुजरात की, आस्था का आगार | 
माँ   शेरावाली    करे ,  मेरा   बेडा   पार  ||
(सुख-समृद्धि सम्पन्नता और शान्ति)

महाराष्ट्र का राज भी,  मचा  रहा  आतंक,
 अंडमान  तन्हा रहे,  रोज मारता डंक ||
(राज दार  /  अकेलापन   )

तेलंगाना  हो  गया, सारा  मध्य प्रदेश,
आंध्रा में फैले  सदा, ईर्ष्या सह विद्वेष ||
(मारकाट / भूख-प्यास और ससुराल में बुराई )

तमिलनाडु अम्मा चली, बाबू का करुणांत |
कर-नाटक का खात्मा,  लड़ते  संत-महंत ||
(सास तीर्थयात्रा, बाबु जी स्वर्ग )  (समस्या-समाधान के लिए टोना-टटका, पूजा पाठ)

हरियाणा-पंजाब  हो,   गुजर  रही है शाम,
अरुणाचल के उदय से, होगा सम आसाम ||
(दारुबाज दोस्तों का साथ)     (नई सुबह ----समाधान )

केरल  के साहचर्य  से, यूपी  के  उत्पात,
बंद हो सकेंगे सभी,  घातों  के  प्रतिघात ||
(पढ़े-लिखे समझदार)    (नोंक-झोंक)

अब तो बस इन्तजार है, संस्कृति हो बंगाल,
काट-पीट कर फेंक दे, वैमनस्य  के  जाल ||
(रास-रंग, बेहतर समझबूझ)  (कूटनीतिक परिदृश्य )

देह   हमारी   हो   गई,   पूरी    राजस्थान,
हरियाली अब कर सके, गंगा का वरदान ||
( विषम परिस्थिति )

जल्दी     गोवा    बनेगी,   लक्षद्वीप   की    रेत,
मणि-मेघा-सिक्किम-दमन, त्रिपुरा-लैंड समेत ||  

24 June, 2011

50 वीं पोस्ट का प्रारब्ध- : ढूंढता हूँ एक शब्द --

बीते कई अब्द *            *साल  
मिले न शब्द --
जद्दोजहद |
चाहूँ लिखना--
परन्तु 
नहीं जद्द-बद्द ||
ढूंढता हूँ एक शब्द --

मिलते ही 
स्नेह से पुचकारुंगा |
उसकी आत्मा को पुकारूँगा |
यदि आई तो ठीक 
नहीं तो उसे
पटकूंगा-झटकुंगा |

तोडूंगा-मरोडूंगा  
काट के -फाड़ के  |  
जैसे भी शब्द से 
कुछ भाव निकाल के |   
परोस दूंगा ||

अब बारी पाठक की 
झेलता रहे--
अगर भाव सकारात्मक तो 
नीति या सन्देश |
और अगर नकारात्मक तो
हास्य-व्यंग ||

नजरिया नहीं है तंग --
है यदि भाव-विहीन 
तो क्या?
पाठक झेले 
कुछ देर "शब्द"  से खेले ||