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04 February, 2016

पालक है क्या? पूँछता, था भलमानुष एक-

ठेला पर सब्जी रखे, बेंचे बालक नेक |
पालक है क्या? पूँछता, था भलमानुष एक |

था भलमानुष एक, अगर पालक ही होता |
मैं बेचारा बोझ, यहाँ आकर क्यूँ ढोता |

कह रविकर कविराय, कमाऊ पूत अकेला |
पालूं मैं परिवार, लगा सब्जी का ठेला || 

31 January, 2016

बड़े धर्म निरपेक्ष हैं, ना वैष्णव ना शैव-

(1)
बड़े धर्म निरपेक्ष हैं, ना वैष्णव ना शैव।
मंदिर मस्जिद चर्च पे, पक्षी उड़े सदैव।

पक्षी उड़े सदैव, दैव ना डाले दाना। 
पाया मंदिर मात्र, बिना खतरे के खाना।

रविकर मस्जिद चर्च, अगर पक्षी को पकडे।
कच्चा जाँय चबाय, बड़े तगड़े हैं जबड़े।।

(2)
थाली में बोटी मिले, नाली में नित खून |
प्याली में हड्डी धरे, भेजा भरे जुनून |
भेजा भरे जुनून , विश्व को रहा जलाता |
खाता हर दिन गोश्त, अहिंसा हमें सिखाता |
फिर रविकर सा धूर्त, कर रहा रोज दलाली |
थाली में ले खाय, छेद देता फिर थाली ||



मुश्किल मे उम्मीद का, जो दामन ले थाम .
जाये वह जल्दी उबर, हो बढ़िया परिणाम..

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05 January, 2012

भूली-बिसरी यादें : 1984 की

कातर स्वरों में सब रोने लगे हैं
सूखे हलक खुद के,  भिगोने लगे हैं ||

जागे हैं दुर्गम, अजेय शत्रु सब 
सदाचार शर्मशार सोने लगे हैं ||

'सनक' सदाफल से सुमनों को तोड़
सत्यानाशी ठौर-ठौर बोने लगे हैं ||

लहरों का मिज़ाज बिगड़ जो गया 
सुनामी शहर-ग्राम, झट धोने लगे हैं || 

अपने हिम्मत की दाद देते 'रविकर'
जिन्दा लाशें स्वयं की ढोने लगे हैं ||

13 October, 2011

दलील और वाणी पुन्नू की प्रबल --

वाणी पुन्नू  की  प्रबल,  अन्नू  का  उपवास | 
चित्तू  का  डंडा  सबल,  दिग्गू  का  उपहास |

लोकपाल  मुद्दा  बड़ा,  जनता  तेरे  साथ |
काश्मीर का मामला, जला रहा क्यूँ  हाथ ?

कालेधन  से  है  बड़ा, माता  का  सम्मान |
वैसी भाषा  बोल मत,  जैसी  पाकिस्तान ||

झन्नाया था गाल  जब,  तू   तेरा  स्टाफ |
उस बन्दे को कूटते,  हमें  दिखे  थे साफ़ ||

सड़को पर जब आ गया, सेना का सैलाब |
तेरे  बन्दे  पिट गए,  कल  से  थे  बेताब  |

करना यह दावा नहीं,  हो  गांधी  के भक्त |
बड़ी दलीलें  तुम रखो,  उधर है  डंडा  फ़क्त ||

वैसे  दूजे  पक्ष  को,  मत  कर  नजरन्दाज |
त्रस्त बड़ी सरकार थी,  मस्त  हो रही आज ||

पहले  पीटा  फिर  पिटा,  चले   कैमरे  ठीक  |
होती  शूटिंग सड़क  पे, नियत लगे  ना  नीक ||

घूँस - युद्ध  की  नायकी,  घाटी  में  यूँ  डूब |
घूँसा जबड़े  पर  पड़ा,   देत   दलीलें   खूब ||



घाट-घाट पर घूम, आज घाटी को माँगें ||



टांगें  टूटी  गधे  की ,  धोबी   देता   छोड़ |
बच्चे   पत्थर  मारके,   देते  माथा  फोड़ |


 


 देते माथा  फोड़,   रेंकता  खा  के  चाटा |
 मांगे जनमत आज, गधों हित धोबी-घाटा |





घाट-घाट पर घूम,  मुआँ  घाटी को माँगें |
चले चाल अब टेढ़ ,  तोड़  दे  चारों  टांगें ||

08 October, 2011

दीपक बाबा की प्रेरणा से -- बक बक

निर्बुद्धि की जिन्दगी, सुख-दुःख से अन्जान |
निर्बाधित जीवन जिए,  डाले  न व्यवधान  ||

बुद्धिमान करता रहे , खाकर-पीकर मौज |
एकाकी जीवन जिए, नहीं  बढ़ाये  फौज ||
https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjD00zigwpPaXooo4doRttliM3LmMQNmWbOaaS9MgM45aD3SDBa8Fj97Fg1qPEHWEZblWEF9SZfYvQdbJfWf2qiLF-sFs1eeIFyukAUVdQBkm0UbTExsv-nC4ADoprZO-ga60M8IHHs1jz_/s1600/a_mayawati_0414.jpg
बुद्धिवादी परिश्रमी,  पाले  घर  परिवार |
मूंछे  ऐठें  रुवाब से,  बैठे  पैर  पसार  ||
बुद्धिजीवी  का  बड़ा, रोचक  है  अन्दाज |
जिभ्या ही करती रहे, राज काज आवाज ||
Former Chief Minister of Madhya Pradesh and Congress leader Digvijay Singh gestures during an interview, in New Delhi on March 26, 2009.
बुद्धियोगी  हृदय  से,  लेकर  चले समाज |
करे भलाई जगत का, दुर्लभ हैं पर आज ||
Anna Hazare and Mahatma Gandhi


05 August, 2011

लघु-$ता : दुर्मुख-विजयी सोच |

एक गाँव है पटरंगा | 
पूरब - पश्चिम में बड़ी अदावत है |
 

कई वर्षों से पश्चिमवालों का ही दबदबा है | 
मुखिया भी पश्चिम का |
 

मुखिया मुख सो --- 
ही है पर  पुश्तों की  काली कमाई  जमा क़र रखी है  स्विसराल में |
इधर अन्ना बाबा के साथ मिलकर पूरब वालों ने हल्ला बोल रखा है ||
 

ये मुखिया अभी हाल में, हफ़्तों स्विसराल में बिता क़र आया  है  |
भला अब कैसे निकले, दुबारा ? और अपनी काली कमाई ठिकाने लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाये ?? 
 

इसी उधेड़बुन में था मुखिया कि एक दिन दुर्मुख-विजय मिला,
और अगले हफ्ते मुखिया हो गए,
बड़े शहर के बड़े हस्पताल में एडमिट ||

सब साले सेवा में ---

शल्य क्रिया सफल हो || 
शुभकामनाएं--

05 July, 2011

दुबई में बारिस |

खिलखिलाकर वो हंसीना हंस पड़ी जब जोर से 
बिजलियों ने तड़प करके बादलों को खूब धोया |

बादलों के आंसुओं से  इस कदर सैलाब आया, 
सब्रका  झट बांध  टूटा  कि क़यामत आ गई || 

शुष्क  रेगिस्तान जलता, जलजले से यूँ  पटा , 
मस्त-काया सा भिगोया वो रुपहला बुर्ज दुबई | 

मोती मिला मानुष हिला कि चून गीला हो गया, 
जो  सून  बिन-पानी  रहे,  पानी  हुए  पानी  हुए |

वे  कंटीले  झाड़  सारे, खिलखिलाकर  हँस  पड़े,
खिल सकेंगे रेत में भी, इश्क के अरुणिम-गुलाब |

आस्मां  हरदम  जहाँ  होता  रहा था  आसमानी
पहली  दफा  वो  जिंदगी  में इन्द्र-धनुषी हो गया |

तेल  के  सूखे   कुएं   में   आज   पानी   जा  घुसा  
मंडूक  ने  टर-टर  सुनाई  मीन  प्यासी  मर  गई ||

 
                

21 June, 2011

फिर से दूल्हा सजते हो तुम |

फिर से दूल्हा सजते हो तुम |
सारी संध्या  बजते हो तुम |
कितने अच्छे लगते हो तुम |
जब मंडप से भगते  हो तुम ||
              (२)
दिन भर जमके खटते हो तुम |
टुकड़े-टुकड़े बंटते हो तुम |
फिर उल्लू सा जगते हो तुम |
कितने अच्छे लगते हो तुम ||

अंधेर है,अंधेर है

13 June, 2011

प्रधानमंत्री बोले दुर्भाग्यपूर्ण ||

माँ गंगे की सफाई के लिए                                     काली-कमाई भारत लाने के लिए 
62 दिनों का लम्बा अनशन जिए --                       रामलीला में अनशन किये
फिर स्वामी निगमानंद जी को गंगा-लाभ ---       बाबा रामदेव को सरकार का जवाब--
मंत्री बोली दुर्भाग्यपूर्ण ||                                        बाबा से कोई बातचीत नहीं होंगी--
                                                                               अब तो --  बच गया योगी ||
                                                                               ठग दिग्विजय का बाबा ढोंगी 
                                                                               रामलीला की धुलाई के बाद--
                                                                               प्रधानमंत्री बोले थे दुर्भाग्यपूर्ण ||
                                                                 अब, प्रधानमंत्री फिर बोलेंगे दुर्भाग्यपूर्ण ||
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी
थाने में व्यभिचार और हत्या |
अतिशय दुर्भाग्यपूर्ण ||
   
   (२)
सपने बहुत जरुरी है,
बिन सपने जीवन-यात्रा अधूरी है|
सपनों पर सम्यक विचार करो,
तदनुसार योजना तैयार करो |
बस, हकीकत का रूप देने की देरी है,
आगे बढ़ो, अब सफलता तुम्हारी चेरी है  ||
लेकिन, जब विचार होंगे बिगडैल 
सम्यक योजना में -- घाल-मेल |
तब तो -- सारे स्वप्न रहेंगे अधूरे 
कभी न हो पायेंगे पूरे ||