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21 May, 2012

सरप्राइज देते रहो, अतिथि बिना तिथि आय के-

 छप्पय / छप्पन-भोग 

chocolate bananaDiwali Faral


जब आते मेहमान, खाने को बढ़िया मिले ।
मस्त मस्त पकवान, मालपुआ-गुझिया तले।


Khas Khas jo seero(poppy seeds dessert)


अतिथि रखो बस ध्यान, धीरे  धीरे पाइए ।
पेटू रविकर जान,  अपना फर्ज निभाइए ।  


Laai(chikki)


बीबी रखती है सदा, नजरें खूब गड़ाय के ।
सरप्राइज देते रहो, अतिथि बिना तिथि आय के ।।

Dal Pakwan

23 March, 2012

दफ़्न करना जरा, साथ में इक कलश-


मुझे नहीं पता यह क्या हो गया मुझको --
क्षमा सहित यह तुरंती ।
डाकिया डाकुओं से, बुरा हो गया ।
लूट लेता है तन्हाई, आकर यहाँ ।
 चिट्ठियाँ क्या पढूं , हाल मालुम हमें 
या खुदा मैं रहूँ आज जाकर कहाँ ।। 

मैं नकारा नहीं था कभी भी प्रभु
खुब कमाया खिलाया-पिलाया सदा ।
आज मशगूल हैं मद पिए मस्त वे 
देव किस्मत में अपने, लिखा क्या बदा ।।

केश काला नहीं, तन करारा नहीं 
दिल में बैठे रहे, क्यूँ निकाला नहीं  ।
हर्ट की सर्जरी पास-बाई किया 
मूंग दलती रहो,  कुछ बवाला नहीं ।

वसीयत तुम्हारे लिए कर दिया 
चार कमरों की बोतल तुम्हारी हुई ।
दफ़्न करना जरा, साथ में इक कलश 
मस्त हो सो सके, देह हारी हुई ।
 

25 February, 2012

मेरे अरुण भैया --

Picture of Cup of Tea - Free Pictures - FreeFoto.com


नाश्ता 

हरे चने की चाट थी,  मस्त जायकेदार।
चाय ताजगी से भरी, शिष्ट-मिष्ट व्यवहार।

शिष्ट-मिष्ट व्यवहार, व्यस्त जीवन में रहते
भैया सदाबहार, नर्मदा सादृश  बहते।


सहकर्मी बीमार, खबर पर भागे भागे।
सेवा का ले भार, रहें  वे  सबसे आगे।। 



भोजन 
आवभगत जम के हुई, ब्लॉग-मित्र का धर्म ।
थी अपनी वेटिंग टिकट , करवा दी कन्फर्म ।


करवा दी कन्फर्म, दाल सब्जी फल चावल ।
खाने में क्या शर्म, पेट हित दुनिया पागल ।

होता रविकर धन्य, पाय साहित्य खुराकी ।
परम्परा आसन्न, पिता की पावन झांकी  ।।

[arun+nigam.jpg] 










                      परिवार 

पूज्य पिता से पाय के, साहित्यिक सुविचार ।
ब्लॉग-जगत को भेंटते, संस्कार उपहार ।
संस्कार उपहार, पुत्र दो डाक्टर पाए।
  रायपुरी है एक, एक बी एच यु आये ।
प्यारा छोटा पुत्र, पढ़े अभियंत्रण विद्युत् ।
कलाकार वह श्रेष्ठ,  वायलिन पर है उद्द्यत ।। 

लक्ष्मण मस्तुरिहा 
एक व्यक्ति में फिर दिखा, शारद का आशीष ।
लक्ष्मण मस्तुरिहा मिले, बहुतों से इक्कीस ।

बहुतों से इक्कीस, मधुर वाणी में गायन ।
गीतकार अति श्रेष्ठ, भाव लागे मन भावन ।

बहुत बहुत आभार, आत्मा धन्य हो गई ।
नौ घंटे का साथ, ऊ--ऊर्जा  देत   नई  ।   

 
Lord Shiva, at Kachnar City in Jabalpur, India. [ Explored ]
अदरक वाली चाय ले, हुए सभी तैयार ।
शिव के दर्शन के लिए, चले सिटी कचनार ।

चले सिटी कचनार, साठ  फुट ऊंची मूरत ।
मस्त पलक अधबंद, प्रभू की दमके सूरत । 

शिवरात्री की सांझ, नशा भक्ती का छाया  ।
 भोले शत परनाम, मित्र भैया सा पाया ।।