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14 July, 2016

मसले को निपटाय, फटाफट मच्छर मसले

(१)
पका-पकाया सूत्र है, पका-पकाया मन्त्र |
करो दुष्टता दुष्ट से, जो करता षड्यंत्र |
जो करता षड्यंत्र, तंत्र सक्रिय हो जाए |
कर समूल विध्वंश, नहीं अब बचने पाये |
रविकर हुआ बिलम्ब, घड़ा तो भरा पाप का |
दे रविकर झट फोड़, बढ़ें सम्मान आपका ||
(२)
मसले ना निपटा सके, पटा सके ना लोग।
मच्छर फैलाते रहे, मलेरिया सा रोग।
मलेरिया सा रोग, चिकित्सा नीम-हकीमी।
बढ़ता रहा बुखार, पड़ी धड़कन भी धीमी।
सत्ता से इक चाह, खत्म कर इनकी नस्लें।
मसले को निपटाय, फटाफट मच्छर मसले।
(३)
पिस्सू-मच्छर हैं चतुर, खटमल लिया पटाय |
करवाते खटिया खड़ी, जब-तब मौका पाय |
जब-तब मौका पाय, कान पर जूँ ना रेंगे । 
देंगे कड़े बयान, और कुछ नहीं करेंगे |
कुछ चीलर कुछ चील, कलम-द्रोही कुछ घिस्सू । 
करें समर्थन रोज, वहाँ हँसता है पिस्सू ||
(४)

जिन्दा हैं तो धन मिले, मर जाएँ तो हूर | 
पत्थरबाजी कर रहे, कश्मीरी मगरूर |
कश्मीरी मगरूर, अगर बादल फट जाए |
फट जाए *तशरीफ़, और फिर सेना आए |
कह रविकर बेशर्म, नहीं होंगे शर्मिंदा |
लेंगे मदद तुरंत, ताकि बच जाएँ जिन्दा ||
*तशरीफ़ रखिये हुजूर
(५)

देख रहे है वानगी, जबर एक से एक |
दिखा रहे हैवानगी, रविकर शत्रु अनेक |
रविकर शत्रु अनेक, नाच नंगा करता है |
जब-तब लेता छेक, समय पानी भरता है |
दवा बढ़ाये मर्ज, भयंकर दर्द सहे हैं |
राम-वाण अब मार, दरिन्दा देख रहे हैं ||

09 July, 2016

रहा आयतें पूछ, रोक पहले की पूजा-

पूजा करते ये युवा, पढ़े नमाज जमात।
धर्म-कर्म में डूबते, कुल बुजुर्ग मुस्कात।

कुल बुजुर्ग मुस्कात, उतरते गहरे जाते।
पढ़ें धार्मिक ग्रन्थ, सुनाते सुनते नाते।

पहला बनता साधु, बने आतंकी दूजा।
रहा आयतें पूछ, रोक पहले की पूजा।।

17 February, 2016

धरे हाथ पर हाथ, करे क्या देख गिलानी

राष्ट्रवाद का पक्ष लो, या विपक्ष के साथ।
रह सकते निरपेक्ष भी, धरे हाथ पर हाथ।

धरे हाथ पर हाथ, करे क्या देख गिलानी ।
राष्ट्र-विरोधी नाद, सुनो हाफिज की बानी ।

रहा कन्हैया साथ, तथ्य यह बिन विवाद का |
वह भी जिम्मेदार, विरोधी राष्ट्रवाद का ||


(2)
निंदा कर रविकर कड़ी, गलत कुटाई नीति |
गाली-गुप्ता भी गलत, किन्तु विदेशी प्रीति |

किन्तु विदेशी प्रीति, देश को घुड़की देते |
देशद्रोहिता साफ़, नाम मोदी का लेते |

पूरा गया विपक्ष, जहाँ पर अफजल जिन्दा |
आयोजक की किन्तु, नहीं करते वे निंदा ||

14 February, 2016

सोओ मत सरकार, बनाओ नहीं बहाना-

(1)
नहीं बहाना है हमें, निर्दोषों का रक्त।
किन्तु बचे गद्दार क्यूँ, बिता रहे क्यूँ वक्त।
बिता रहे क्यूँ वक्त, पकड़ कर इनको लाओ।
विधि विधान जब शख्त, मुक़दमे झट निपटाओ।
बचें नहीं गद्दार, समर्थक इनके नाना।
सोओ मत सरकार, बनाओ नहीं बहाना।।

(2)
उत्तेजक नारे लगा, बच जाये बेदाग।
दोषारोपण अन्य पर, करे लगाकर आग।
करे लगाकर आग, कहानी वोट बैंक की। 
ये पाकी गद्दार, सुवर नालायक कुत्ते।
हुवे विपक्षी एक, और रविकर एकाकी।
नहीं क्षमा के पात्र, नहीं हैं सीधे उत्ते।।

(3)
पाले-पोसे जन्म दे, पैलौठी का लाल।
तिल-तिल जो गलती रही, उस से करे सवाल।
उस से करे सवाल, चला दे माँ पर ढेले। 
पढ़कर एक किताब, शत्रु के हाथों खेले।
करे जंग की बात, सतत अपशब्द निकाले। 
देंगे हम मुँहतोड़, उसी माँ के हम पाले।

(4)
गतिविधियाँ आतंक की, जे एन यू में नित्य।
देश द्रोहिता चरम पर, शर्मनाक ये कृत्य।
शर्मनाक यह कृत्य, सबक इनको सिखलाओ ।
कहते जिन्हें शहीद, इन्हें उनतक पहुँचाओ।
सरकारी संज्ञान, अन्यथा जनता रक्षति।

राष्ट्रभक्त तैयार, करे हम इनकी दुर्गति।

04 January, 2015

होता रविकर खेत, पड़े बेमौसम ओले -

ओले गोले सा बरस, चौपट करते खेत |
गलते थोड़ी देर में, मिटते फसल समेत |

मिटते फसल समेत, फिदाइन इनकी फितरत। 
पहुँचाना नुक्सान, हमेशा रखते हसरत ।  

बड़े अधम ये लोग, जहर दुनिया में घोले । 
होता रविकर खेत, पड़े बेमौसम ओले ॥ 
दोहा 
गैरों ने काटा गला, झटपट काम तमाम । 
अपने तो रेता किये, लिए एक ही काम ॥