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01 May, 2012

रविकर के चुटुकुले भी, लगते हैं अश्लील -

 उनकी मदिरा सोमरस, इज्जत करे समाज ।
रविकर पर थू थू करे, जो खाया इक प्याज ।।

 बाइक को पुष्पक कहे , घूमे मस्त सवार ।
 रविकर का वाहन लगे, उसे खटारा कार । 

रविकर आदर भाव का, चाटुकारिता नाम ।
नजर हिकारतमय वहां, ठोके किन्तु सलाम ।।

रविकर के चुटुकुले भी, लगते हैं अश्लील ।
मठ-महंत के हाथ से, कर लें वे गुड-फील ।।

  जालिम कर दे क़त्ल तो, वे बोले इन्साफ ।
रविकर देखा भर-नजर, नहीं कर सके माफ़ ।।

रविकर करे ठिठोलियाँ, खाय गालियाँ खूब ।
पर उनके व्यभिचार से, नहीं रहे वे ऊब ।। 

रविकर की पूजा लगे, ढकोसला आटोप ।
खाए उनकी गालियाँ, करे न उनपर कोप ।।

रविकर चूल्हा कर रहा, प्रर्यावरण खराब ।
उनकी जलती चिता को, हवन कह रहे सा'ब ।।

 तूफानी गति ले पकड़, रविकर  इक अफवाह ।
उनके घर का तहलका, शीतल पवन उछाह ।।

हकीकतें रविकर भली, पर घमंड हो जाय ।
वहां अकड़पन स्वयं  की, बोल्डनेस कहलाय ।।

उनकी दादा-गिरी भी, रविकर रहा सराह  ।
किन्तु हमारी विनम्रता,  बन दीनता कराह ।।