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19 June, 2019

लगता क्या कुरुक्षेत्र, हमारे अब्बू का घर-

घर मेरे माँ-बाप का, बेगम करे बखान।
झगड़ा मत करना यहाँ, रखना सबका मान।
रखना सबका मान, मियाँ का चढ़ता पारा।

बात तुम्हारी ठीक, बोलकर ताना मारा।

क्यों देती हो छेड़, वहाँ पर झगड़ा अक्सर।

लगता क्या कुरुक्षेत्र, हमारे अब्बू का घर।।
(2)

😊😊😊😊😊😊😊😊😊नहला
मेरे पिताजी का भवन, घुसते हुए पत्नी चे'ताई।
अब ठीक रखना मूड अपना, मत यहाँ करना लड़ाई।

😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊दहला
लगता तुम्हे कुरुक्षेत्र क्या, #मेरे #पिता #का #घर कहो।
गाहे-बगाहे छेड़ देती जो महाभारत अहो।।

(3)

😊😊
ज्यों होश में आई प्रसूता, खूब उत्सुकता दिखाई।
कुछ खोजते जब नर्स देखी, पालने से शिशु उठाई।।
मैं शिशु नहीं निज फोन खोजूं, प्लीज जल्दी दीजिये।
#स्टेटस लगाना #फेसबुक पर, और लेनी है बधाई।।

😊😊😊

प्राप्त की दो भ्रूण-हत्या कर मनौती पर जिसे।
भेज वृद्धाश्रम गया था, कल वही बालक उसे।
जाते हुवे उस पुत्र को वह रोकती आवाज दे-
बोझ मत रखना हृदय पर, बोली हकीकत पुत्र से।।

सुगर अवसाद प्रेसर का, बता अंजाम क्या होगा।
लगाई पंक्ति प्रातः ही, मगर डॉक्टर करे योगा-
दवा की लिस्ट लम्बी सी, दिया फिर चार सौ लेकर-
बदल ली किन्तु दिनचर्या, तिलांजलि लिस्ट को देकर।।


कुछ व्यंजनों के प्राण निकलें, सुन स्वरों की व्यंजना।
अभिव्यंजना की हर समय, मात्रा करे आलोचना।
मात्रा लवण की यदि उचित तो स्वाद व्यंजन का बढ़े-
रख वाक्य में मात्रा उचित, कवि मन्त्र देते है बना।।


नशे में बुद्धिजीवी सब, दलाली मीडिया करता।
मदान्धी हो रही सत्ता, कुकर्मी कब कहाँ डरता।
तमाशा देखती जनता, नपुंसक हो चुकी अब तो-
अगर है जागरुक कोई, वहाँ भी आह वह भरता।।


चुनावों में गुनाहों की नहीं चिंता करे कोई।
बयानों की झड़ी लगती, न ई. सी. से डरे कोई।
कहीं विस्फ़ोट बमबाजी कहीं पत्थर चलाते हैं-
करे कोई भरे कोई, जिये कोई मरे कोई।।


कहती गर्मी ऊन की, मैं तो सबसे गर्म।
सुनकर उबले खून तो, कहे सूत बेशर्म।
कहे सूत बेशर्म, देख लो सड़कें सूनी।
मैं हूँ सबसे गर्म, बोलता एक जुनूनी।
लेकिन आया जून, गर्म लू बहती रहती।
त्राहिमाम् का शोर, बचा लो दुनिया कहती।।


सेल्सगर्ल की कामना, बिक जाएँ कुछ कार।
वरना देगी फर्म यह, मेरे वस्त्र उतार। (मुहावरा)
मेरे वस्त्र उतार, कहे इक कॉलगर्ल तब।
बिके अन्यथा कार, दूसरा मार्ग नहीं अब।
अजब-गजब हालात, कामना कॉल गर्ल की।
कह रविकर वह फिक्र, बने अब सेल्सगर्ल की ।


हँसकर वह मैके गई, परेशान श्रीमान।
रखी कहाँ कंडोम तुम, पूछा उसी विहान।
पूछा उसी विहान, फोन पत्नी को करके।
मिले नहीं कंडोम, पास में मेरे घर के।
इसीलिए मैं साथ, बैग में लाई रखकर।
पटक रहा पति माथ, कही जब पत्नी हँसकर। ।।


आया मेरा फोन यदि, राज न देना खोल।
मेरे पति घर पर नहीं, झट से देना बोल।
झट से देना बोल, फोन आया ज्यों रविकर।
घर पर हैं पतिदेव, दिया पत्नी ने उत्तर।
पति करता जब क्रोध, उसे उसने समझाया।।
नहीं तुम्हारा फोन, फोन तो मेरा आया ।।

मुस्कुराहट में छुपे हर दर्द को पहचानता।
रोष के पीछे छुपे उस प्यार को भी जानता।
मौन का कारण पता है, किन्तु कैसे बोल दूँ।
आ रही आड़े हमारे बीच की असमानता।।

जरूरत कभी भी न पूरी हुई, सदा नींद भी तो अधूरी हुई।
अरी मौत तेरा करूँ शुक्रिया, जरूरत खतम नींद पूरी हुई।।