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09 September, 2012

मेरे सपनों के भारत में, मोटा मोटा कोटा होगा-

मेरे सपनों के भारत में, मोटा मोटा कोटा होगा ।
बड़ा बड़प्पन रखे जेब में, चालू पुर्जा छोटा होगा ।

गली गली में गदहा लोटा, भांग भरा हर लोटा होगा ।
नकली दाना दवा दिवाना, असली नस्ली  टोटा  होगा ।

संसद में जब लंद-फंद हो, जम कर झोटी झोटा होगा ।
फुरसतिया के हाथों में तब,  बोटी होगी बोटा होगा ।

चीटी चीनी चाट चुकी बस, बहता रहता *चोटा होगा ।
मिली-भगत है सत्ता की सब, दे दे ठेका पोटा होगा ।
*शीरा 
 करके दोहन खनिज-लवण का, माल-मसाला घोटा होगा ।
धरती पोली पोली होगी, केवल बचा लंगोटा होगा ।

परखनली शिशु चपल खरा सा, माँ का बच्चा खोटा होगा ।
इधर कुपोषण से मरियल उत, फास्ट फूड खा मोटा होगा ।। 

इन्स्पेक्टर का राज रहेगा,  सजा हाथ में सोटा होगा ।
सजा-कजा से रखे डराकर, मोटा घूस-घसोटा होगा ।

 (दूसरी प्रस्तुति : उल्टा-पुल्टा )

सपनों का भारत दिखे, लिखे मुँगेरी लाल |
रुपिया बरसे खेत में, घर में मुर्गी दाल |
घर में मुर्गी दाल, चाल सब चलें पुरातन |
जर जमीन जंजाल, बजे हर घर में बरतन |
चचा भतीजावाद, राज भी हो अपनों का |
बझा रहे हर जंतु, यही भारत सपनों का ||

( पहली प्रस्तुति )
भीड़ घटे श्मशान में, हस्पताल में रोग ।
दारुण दुर्घटना घटे, सदा घटे संजोग ।
सदा घटे संजोग, भ्रूण हत्या ना होवे।
हो दहेज़ अब बंद,  कहीं कुत्ता ना रोवे ।
देखे रविकर स्वप्न, ध्वस्त दुश्मन-मनसूबे ।
सूबे सब खुशहाल, नहीं जी डी पी  डूबे ।।